
1- परिचय
घुटने का दर्द आज के समय में एक आम समस्या बन चुका है, जो युवा, मध्यम आयु वर्ग और बुज़ुर्ग—सभी को प्रभावित करता है। गलत जीवनशैली, चोट, मोटापा या बढ़ती उम्र के कारण घुटनों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे दर्द, सूजन और जकड़न जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। घुटने का दर्द: कारण, लक्षण, घरेलू उपाय, प्रभावी योगासन और बचाव के तरीके जानें। घुटने का दर्द कम करने के प्राकृतिक उपाय, सही देखभाल और जीवनशैली से जुड़ी उपयोगी जानकारी पढ़ेंयदि घुटने के दर्द को समय रहते न समझा जाए, तो यह गठिया (Arthritis) या जोड़ खराब होने जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
यह लेख घुटने के दर्द के कारणों, लक्षणों, घरेलू उपायों, उपयोगी योगासन और बचाव के तरीकों पर आधारित है।
हम देखते है कि घुटने के जोड को बनाने में पहली ऊपर वाली हड्डी जिसे हम जांघ की हड्डी(Femur) कहते है, और फीमर हड्डी को जिसने संभाल रखा है वह पिंडली की हड्डी(Tibia) और पिंडली की छोटी हड्डी(Fibula) ने, सामने से जब हम देखते है तो टिबिया हड्डी हमें सामने की तरफ दिखाई देती है और फीबुला लगभग पीछे। या साइड में हम समझ सकते है। और एक घुटने की टोपी या घुटने की हड्डी (Patella) हड्डी है जो घुटने के जोड पर ऊपर नीचे सरकती रहती है । फीमर और टिबिया एवं फीबुला इनको आपस में जोड़ कर रखने का काम (Ligament) करती है। तो स्नायुबंधन जो लिंगामेंट सामने से घुटने को जोडकर रखती है उसे घुटने का आगे वाला क्रूस स्नायुबंधन (anterior cruciate Ligament [ACL]) कहते है। और फिर हमारे घुटने को पीछे से जो पकडकर या जोडकर रखती है उसे हम पश्च क्रूस स्नायु बंधन (posterior cruciate Ligament [PCL]) कहते है। और जो लिगामेंट हमारे घुटने के जोड़ को बांयी तरफ से जोड़कर रखती है उसे हम बाहरी पार्श्व स्नायुबंधन (lateral collateral ligament [LCL] ) कहते है, साथ ही घुटने के जोड़ को जो स्नायुबंधन दाहिनी तरफ से जोड़कर रखती है उसे हम भीतरी पार्श्व स्नायुबंधन (Medial collateral Ligament [MCL]) कहते है। पटेला को जोडकर रखने वाली रचना को पटेला कण्डरा (patellar Tendon) कहते है। ये 4 तरह की लिगामेंट हमारे घुटने के जोड़ को पकड़कर रखती है। और घुटने की मसल्स भी जोड़ को मजबूती प्रदान करते है जिसकी वजह से हम चल पाते है ।
- कंडरा (Tendon) –
i- यह एक संयोजी ऊतक (connective tissue) होता है जो मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ता है । [Muscle to Bone]
ii- ये मजबूत और कम लचीले होते है।
iii- इसके तंतु बंडल के रूप में होते है।
iv- ये सफेद तन्तुमय संयोजी ऊतक (Fibrous connective tissue) के बने होते है।
v- टेंडन फाइबर लंबे होते है।
- स्नायु (Ligament) –
i-यह भी एक तरह की संयोजी ऊतक है जो हड्डियों को हड्डियों से जोड़ती है। (Bone to Bone)
ii- ये मजबूत और लचीले होते है।
iii- इसके तंतु या फाइवर छितरे होते है, बंडल में नही होते है।
iv-ये पीले फाइबर संयोजी ऊतक के बने होते है ।
v-लिगामेंट फाइबर छोटे होते है।
- घुटने के स्नायु तंतु(knee Ligament)-
घुटने में जोडों के बीचो बीच जोड़ को घिसने या रगड़ खाने से बचाने के लिए एक लेयर या गद्देदार रचना पाई जाती है जिसे अर्धचन्द्राकार उपास्थि (मेनिस्कस meniscus) कहते है। इसी जोड के आस- पास संधि थैली (बर्सा Bursa) पाई जाती है।
- बर्सा(Bursa) एक तरल पदार्थ से भरी संरचना है जो त्वचा और टेंडन या टेंडन और हड्डी के बीच मौजूद होती है। बर्सा का मुख्य कार्य आसन्न चलती संरचनाओं के बीच घर्षण को कम करना है। कभी कभी बर्सा में इन्फेंशन हो जाने से, चोट लग जाने से बर्साइटिस(bursitis) हो जाता है।
एक ध्यान देनी वाली बात है पटेला जो हड़्डी है उस हड्डी को जोड़ के साथ पकड़ कर रखने के लिए पटेलर लिगामेंट(patellar ligament) होती है। कई बार हम ACL ligament को ही patellar ligament समझ लेते है लेकिन ऐसा नही है, ACL लिगामेंट, patellar ligament के पीछे या नीचे होती है।
घुटने के जोड को चतुष्कोणीय पेशी (क्वॉड्रीसेप्स मसल(quadriceps Muscle)) यानि जांघ के आगे की 4 मांसपेशी या जांघ के पीछे की मांसपेशी (हैमस्ट्रिंग) मजबूती देते है, साथ ही पिंडली की मांसपेशियां भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। अकसर घुटने के मरीजों में देखा गया कि उनमें पिंडली की मांसपेशियों में भी काफी दर्द होता है। हर जोड के बीच में साइनोवियल झिल्ली होती है। साइनोवियल झिल्ली साइनोवियल तरल बनाती है जो जोड के अंदर ग्रीस का काम करती है।
- गठिया- ARTHRITIS
घुटने में गठिया होने पर घुटने के जोडों के बीच फासला कम हो जाता है और घुटने घिसने शुरू हो जाते है। ये चार स्टेज में बीमारी बढती चली जाती है। हल्के गठिया में घुटने में गैप थोड़ा कम होता है और कभी कभी घुटनें में दर्द और जकड़न होती है। फिर मध्यम स्तर में घुटने में आते-जाते गैप और कम हो जाती है और आदमी का चलना फिरना कम होने लगता है घुटने में कट-कट की या चर-चर की आवाज आने लगती है। और कड़कपन काफी बढ जाता है साथ ही सूजन भी आने लगती है। गंभीर स्तर में घुटने का फासला एकदम खत्म हो जाता है, घुटने की हड्डी एक दूसरे से टकराने लगती है। इसमें आदमी का चलना एक दम बंद सा हो जाता है। गठिया में घुटने में सूजन, जलन, पैरो में दर्द काफी होता है। जोडो में कई तरह की अवांछित रचनाएं बन जाती है जैसे अस्थि कंटक (ऑस्टियोफाइट), बेकर्स सिस्ट (घुटने के पीछे बनने वाली द्रव्य थैली) इत्यादि।
- अस्थि-कंटक (OSTEOPHYTES)
यह हड्डी के किनारों पर बनने वाला एक छोटी हड्डीनुमा उभार होता है, जो घिसाव वाला गठिया (Osteoarthiritis) में आमतौर पर बनता है। ऑस्टियोफाइट अतिरिक्त कैल्शियम की जमावट से बन जाती है या हड्डियों के घिसने से। देखा जाए तो कैल्शियम के चयापचय की गड़बड़ी के कारण कहीं कैल्शियम कम हो जाता है, और कहीं कैल्शियम ज्यादा हो जाता है ।
अस्थिकंटक ऐसी रचनाए है जिनकी वजह से व्यक्ति को सुई के चुभने जैसा दर्द होता है। ये किसी भी जोड के आसपास हो सकती है।
- अस्थि-वृद्धि पटल (Epiphysial plate/line)
हर जोड के पास एपीफीजिएल लाइन होती है ।कहते है जब ये जुड़ जाती है तो हाइट बढना रुक जाता है । इसे हम जिन बच्चो की हाइट नही बढ रही उनमें चेक कर सकते है अगर एपीफीजिएल लाइन नही जुडी है तो बच्चो की हाइट बढाई जा सकती है। और अगर ये जुड़ गई है तो हाइट नही बढ सकती है।
ये हमारे शरीर में मौजूद लम्बी हड्डीयों के हैड पर देखी जा सकती है। तो अगर हम घुटने का मुख्य सार देखे तो घुटने के आस पास रक्त संचार कम होना उसकी वजह से मसल्स कमजोर होना और फिर धीरे धीरे घुटनो का गैप कम होना। इसी तरह शरीर में एसिडिक कंडीशन हो जाना किसी तरह की ऑटोइम्यूलिटी की वजह से घुटने का ग्रीस सूख जाना। एक्सरसाइज ना करना, चोट लगना, गलत खान पान, पानी कम पीना इत्यादि की वजह से घुटने में समस्या आ जाती है।
- घुटने के दर्द के मुख्य कारण
घुटना दर्द के कारण
(A)- आर्थराइटिस – जोड़ो में सूजन, इसके साथ ही दर्द, कड़कपन होता है। यह बहुत ही सामान्य बीमारी है जो लाखो लोग इस बीमारी से पीडित होते है। सबसे ज्यादा रूप से पाया जाने वाला अर्थाराइटिस डीजनरेटिव अर्थाराइटिस है। यह अकसर उम्र बढने के साथ आता है। अर्थाराइटिस को हम गठिया के रूप में भी जानते है। इसके कई प्रकार है जैसे रुमैटिक अर्थाराइटिस, एन्किलोजिंग स्पोन्डिलाइटिस, सोरियाटिक अर्थाराइटिस, इत्यादि। अर्थाराइटिस जोड़ो की बीमारी है और रूमेटिक अर्थाराइटिस जोड़ो के साथ–साथ टिश्यू को भी प्रभावित करता है। गठिया संक्रमण से हो सकता है (जैसे कि रूमेटिक बुखार, स्टेफिलोकोकल संक्रमण, गोनोरिया, तपेदिक), चयापचय संबंधी गड़बड़ी (जैसे गाउट, कैलशियम पिरोफॉस्फेट क्रिस्टल रोग), मल्टीसिस्टम ऑटोइम्यून रोग (जैसे सोरायसिस, रुमेटाइड गठिया, सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस), न्यूरोपैथिस ( जैसे कि चारकोट जोड़), जोडो का आघात, या अंतःस्रावी रोग।
(B)- बर्साइटिस- यह आम तौर पर काम या खेल के दौरान एक मोड़ पर बार-बार तनाव पड़ने के कारण होता है, लेकिन कभी-कभी यह अचानक चोट, जोड़ों की सूजन की बीमारी, या बैक्टीरिया के कारण होता है। सामान्य रूपों में रोटेटर कफ, माइनर या टेनिस एल्बो और प्रीपैटेलर बर्सााइटिस शामिल है। बर्सा में (पानी भरना) द्रव संचय के परिणामस्वरूप जलन, सूजन, अचानक या धीरे-धीरे दर्द होता है।
(C)- डिस्लोकेशन- ज्वाइंट का अपनी जगह से हट जाने के कारण।
(D)- बेकर्स सिस्ट- सिनोवियल(सिह-नो-वी-उल) द्रव नामक एक स्नेहन तरल पैर को आसानी से स्विंग करने में मदद करता है और घुटने के चलने वाले हिस्सों के बीच घर्षण को कम करता है। लेकिन कभी-कभी अंतर्निहित स्थितियों के कारण घुटने बहुत अधिक श्लेष द्रव का उत्पादन कर सकते है। जब ऐसा होता है, तो घुटने के पिछले हिस्से में तरल पदार्थ जमा हो सकता है, जिससे बेकर सिस्ट हो सकता है।
(E)- Meniscus Tear -आपके घुटने के जोड़ को बनाने लिए दो हड्डियां मिलती है: फीमर और टिबिया। नीकैप (पटेला) कुछ सुरक्षा प्रदान करने के लिए जोड़ के सामने बैठता है। फाइब्रोकार्टिलेज के दो गोल कुशन के आकार के टुकड़े आपके फीमर और टिबिया के बीच सदमे/ झटके के अवशोषक के रूप में कार्य करते है। ये meniscus है। meniscus वजन को एक हड्डी से दूसरी हड्डी तक पहुंचाने में मदद करता है और घुटने की स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(G)- गाउट – इसमें ज्वाइंट के अंदर इन्फ्लामेंशन और डीजनरेशन आ जाता है।
(H)- टेंडनाइटिस– ज्वाइंट और मांसपेशी को जोड़ने वाली रचना है। जिसमें सूजन आ जाती है।
(I)- ऑस्टियोआर्थराइटिस
(J)- हड्डियों का कैंसर
(K)- लिगामेंट टूटना
(L)- हड्डडयां कमजोर होना
(M)- पैर मोड़कर लंबे समय तक बैठना
(N)- मोटापा के कारण घुटने पर प्रेशर पड़ना
(O)- खेल कूद के दौरान घुटने में चोट लगना
(P)- काम के दौरान घुटने पर अधिक बल पड़ना
चोट के कारण घुटने में होने वाले दर्द के निम्न प्रकार हैं:-
i. एसीएल चोट- इसे एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट इंजरी भी कहते है। यह अधिकतर खिलाडियों में देखने को मिलता है। इसमें एसीएल खींच या फट जाता है।
ii. फ्रैक्चर: घुटने का फ्रैक्चर होना कष्टदायक हो सकता है। यह अधिकतर मामलों में गिरने, तेज चोट लगने या एसेन्ट्रिक संकुचन के कारण होता है।
iii. मेनिस्कस टियर: मेनिस्कस रबरयुक्त उपास्थि है जो भारी सामान उठाने पर अचानक से मुड़कर फट सकता है।
iv. बर्साइटिस: घुटनों का देर तक इस्तेमाल करना या फिर सामान्य मात्रा से अधिक इस्तेमाल करने पर बर्साइटिस की समस्या पैदा होती है।
v. पेटेलर टेन्डोनिटिस: यह कण्डरा की एक सामान्य चोट या सूजन है जो घुटने की टोपी (पटेला) को पिंडली (टिबिया) से जोड़ती है।
- घुटने के दर्द के लक्षण
* घुटने को मोड़ने व सीधा करने में परेशानी
* घुटने के आसपास सूजन
* पैर हिलाते समय घुटने की हड्डियों में टकराहट से आवाज का आना
* चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने में दर्द
* घुटने में सूजन और गर्माहट
* जोड़ में अकड़न
* भारीपन और कमजोरी महसूस होना
4- घुटने के दर्द के घरेलू उपाय
A. गर्म और ठंडी सिकाई
- ठंडी सिकाई चोट या अचानक हुई सूजन में करें।
- गर्म सिकाई पुराने और जकड़न वाले दर्द में लाभ देती है।
B. हल्दी वाला दूध
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन सूजन और दर्द कम करता है।
रोज़ रात को गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पिएँ।
C. मेथी के दाने
रात में भीगे मेथी दाने सुबह चबाकर खाने से सूजन कम होती है।
D. लहसुन का सेवन
लहसुन प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी होता है और घुटनों की सूजन कम करता है।
E. सरसों के तेल से मालिश
हल्का गर्म सरसों का तेल घुटनों में रक्त संचार बढ़ाता है और दर्द कम करता है।
- घुटने के दर्द में लाभदायक योगासन
A – ताड़ासन – ताड़ासन (Tadasana) योग का एक मूलभूत आसन है, जिसे Mountain Pose भी कहा जाता है। यह शरीर की मुद्रा को सुधारने, रीढ़ को सीधा करने और संतुलन बढ़ाने में मदद करता है। नीचे ताड़ासन के बारे में सरल और स्पष्ट जानकारी दी गई है:

ताड़ासन क्या है?
ताड़ासन खड़े होकर किया जाने वाला एक योगासन है, जिसमें शरीर को एकदम सीधा, संतुलित और स्थिर रखा जाता है—जैसे एक पर्वत। यह सभी खड़े होकर किए जाने वाले आसनों का आधार माना जाता है।
ताड़ासन करने की विधि
- पैरों को आपस में मिलाकर सीधे खड़े हो जाएँ।
- हथेलियों को शरीर के पास रखें और रीढ़ को सीधा रखें।
- धीरे-धीरे श्वास लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएँ।
- हथेलियों को ऊपर की ओर खींचें और पूरे शरीर को लंबा महसूस करें।
- यदि चाहें तो एड़ियों को उठाकर पंजों पर खड़े हों।
- कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें और सामान्य श्वास लें।
- श्वास छोड़ते हुए हाथों और एड़ियों को नीचे लाएँ।
ताड़ासन के लाभ
- रीढ़ सीधी और मजबूत होती है
- शरीर की मुद्रा (Posture) सुधरती है
- पैरों, घुटनों और टखनों में मजबूती
- संतुलन और स्थिरता बढ़ती है
- सांस लेने की क्षमता में सुधार
- शरीर में खिंचाव आता है और थकान कम होती है
सावधानियाँ
- अगर चक्कर आने की समस्या हो तो एड़ियां न उठाएँ
- बहुत लंबे समय तक सांस रोककर न रखें
- घुटने या टखने में चोट हो तो निर्देशानुसार धीरे-धीरे करें
B – वृक्षासन- वृक्षासन (Vrikshasana) योग का एक संतुलन आधारित आसन है, जिसे अंग्रेज़ी में Tree Pose कहा जाता है। यह शरीर को स्थिरता, ध्यान और मानसिक एकाग्रता प्रदान करता है।
वृक्षासन क्या है?
वृक्षासन में शरीर की आकृति एक पेड़ (वृक्ष) जैसी दिखती है—एक पैर पर संतुलन, सीधी रीढ़, और ऊपर उठे हाथ। यह आसन मन और शरीर दोनों के संतुलन को मजबूत करता है।
वृक्षासन करने की विधि
- सीधे खड़े हो जाएँ और पैरों को साथ रखें।
- अब दाएँ पैर को धीरे-से उठाकर बाएँ पैर की जाँघ के अंदर की तरफ रखें
(टखने, पिंडली या जाँघ—जहाँ तक संतुलन बना सकें)। - रीढ़ को सीधा रखें और संतुलन बनाएँ।
- दोनों हाथों को छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में जोड़ें।
- चाहें तो हाथों को ऊपर उठाएँ और पेड़ की तरह फैलाएँ।
- सामान्य सांस लेते हुए 15–30 सेकंड तक रहें।
- धीरे-धीरे वापस आएँ और दूसरे पैर से दोहराएँ।
वृक्षासन के लाभ
- शरीर का संतुलन और स्थिरता बढ़ती है
- रीढ़, जाँघ और पिंडलियों को मजबूती
- एकाग्रता और ध्यान में सुधार
- मानसिक तनाव और चिंता में कमी
- पैरों और टखनों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं
सावधानियाँ
- यदि संतुलन कमजोर हो तो दीवार का सहारा लें
- घुटने में दर्द या चोट हो तो सावधानी से करें
- पैर को घुटने पर न टिकाएँ (घुटने को चोट लग सकती है)
C- बालासन – बालासन (Balasana) योग का एक अत्यंत आरामदायक और विश्राम देने वाला आसन है, जिसे अंग्रेज़ी में Child’s Pose कहा जाता है। यह शरीर और मन को शांत करता है और योग अभ्यास के बीच विश्राम के लिए बहुत उपयोगी होता है।
बालासन क्या है?
“बाल” का अर्थ है बच्चा, और बालासन में शरीर की मुद्रा एक बच्चे की तरह झुकी हुई होती है। यह गहरा रिलैक्सेशन देने वाला आसन है जो तनाव कम करता है और पीठ के निचले हिस्से को आराम देता है।
बालासन करने की विधि
- वज्रासन में बैठें (एड़ियों पर बैठकर)।
- अब धीरे-धीरे आगे झुकें और माथे को जमीन पर टिकाएँ।
- हाथों को आगे की तरफ फैलाएँ या शरीर के पास पीछे की ओर रखें—दोनों तरह से किया जा सकता है।
- कंधों को ढीला छोड़ें और सामान्य सांस लेते रहें।
- 20–40 सेकंड या आराम के अनुसार इस स्थिति में रहें।
- धीरे-धीरे वापस वज्रासन में उठ आएँ।
बालासन के लाभ
- मानसिक तनाव और चिंता कम होती है
- पीठ, कंधे और गर्दन को राहत
- रीढ़ और कूल्हों को खिंचाव मिलता है
- पाचन तंत्र को आराम
- थकान दूर होती है
- योग अभ्यास के दौरान ऊर्जा संतुलित रखता है
सावधानियाँ
- गंभीर घुटने के दर्द या चोट हो तो यह आसन सावधानी से करें
- यदि गर्भावस्था के बाद के महीनों में हैं, तो पेट पर दबाव न डालें
- यदि सांस लेने में कठिनाई हो तो घुटनों को थोड़ा फैलाकर करें
विपरीतकरणी – विपरीतकरणी (Viparita Karani) एक शांत, पुनर्स्थापित करने वाला योगासन है, जिसे अंग्रेज़ी में Legs-Up-the-Wall Pose भी कहा जाता है। यह शरीर को आराम देने, रक्तसंचार सुधारने और मानसिक तनाव कम करने में बहुत उपयोगी माना जाता है।

विपरीतकरणी क्या है?
विपरीतकरणी एक हल्का उल्टा आसन (Inversion) है जिसमें आप अपनी पीठ के बल लेटकर पैरों को दीवार पर सीधा टिकाते हैं। शरीर उल्टा नहीं होता, बस पैरों का भाग ऊपर होता है। इसे करना आसान है और शुरुआती लोग भी कर सकते हैं।
विपरीतकरणी करने की विधि
- दीवार के पास एक साफ जगह चुनें।
- पीठ के बल लेट जाएँ और कूल्हों को दीवार के पास ले आएँ।
- पैरों को दीवार पर सीधा ऊपर की ओर टिकाएँ।
- हाथों को शरीर के बगल में ढीला रखें।
- आँखें बंद करके सामान्य सांस लें और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें।
- “आराम महसूस होने तक 5–10 मिनट इसी पोज़िशन में बने रहें
- वापस आने के लिए पैरों को धीरे से मोड़ें और दाईं तरफ करवट लेकर उठें।
विपरीतकरणी के लाभ
- थके हुए पैरों को तुरंत आराम
- रक्तसंचार में सुधार
- तनाव, चिंता और मानसिक थकान कम होती
- पीठ और कमर के दर्द में राहत
- पैरों और टखनों की सूजन कम करने में मदद
- नींद की गुणवत्ता बेहतर
सावधानियाँ
- यदि गंभीर गर्दन या पीठ की समस्या है तो सावधानी से करें
- उच्च रक्तचाप, ग्लूकोमा या आंखों की समस्याओं में यह आसन न करें
- मासिक धर्म के दौरान कुछ लोग इसे न करने की सलाह देते हैं—यह पूरी तरह व्यक्तिगत आराम पर निर्भर करता है
- घुटने के दर्द से बचाव के तरीके
- वजन को नियंत्रित रखें
- लंबे समय तक एक ही पोज़िशन में बैठने से बचें, शरीर को समय-समय पर मूव करें
- भारी वजन उठाने से बचें
- आरामदायक फुटवियर पहनें
- कैल्शियम और विटामिन D युक्त आहार लें
- रोज़ हल्की वॉक करें
- शरीर को गर्म रखें, खासकर ठंड के मौसम में
- कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि इन स्थितियों में घुटने का दर्द हो, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें:
- दर्द लगातार बढ़ रहा हो
- घुटने में बहुत अधिक सूजन हो
- पैर में सुन्नपन या झनझनाहट हो
- चलने-फिरने में मुश्किल हो
- कोई गंभीर चोट लगी हो
निष्कर्ष
घुटने का दर्द एक सामान्य समस्या है, लेकिन समय पर उपचार, सही दिनचर्या, नियमित व्यायाम और घरेलू उपाय अपनाकर इससे काफी हद तक राहत मिल सकती है। यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो विशेषज्ञ से जांच अवश्य कराएँ ताकि सही निदान और उपचार मिल सके।
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